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Top Tourist place Near By Sagarr

Framework

1. Tikitoriya
2. gouridant
3. vandevi mata
4. rangir
5. lakha banjara lake
6. garhpahra fort

1. tikitoriya

about ….

टिकीटोरिया माता मंदिर मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील में जबलपुर-सागर हाईवे पर स्थित एक प्रसिद्ध प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसे ‘बुंदेलखंड का मैहर’ भी कहा जाता है

tikitoriya

टिकीटोरिया मंदिर का इतिहास और मुख्य आकर्षण

मां सिंहवाहिनी/विंध्यवासिनी मंदिर: पहाड़ी की चोटी पर संगमरमर से बना मां सिंहवाहिनी (अष्टभुजाधारी देवी) का मुख्य मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इस प्राचीन स्थल पर लगभग 500 साल पहले रानी दुर्गावती द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था। [1, 2]

गुफा और अन्य देवालय: मुख्य मंदिर के पास एक गुफा है जिसमें राम दरबार और पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। इसके अलावा, मंदिर के पीछे भैरव बाबा का मंदिर और यज्ञशाला भी है।

रोपवे सुविधा: यहाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुंदेलखंड का पहला अत्याधुनिक रोपवे बनाया जा रहा है, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए माता के दर्शन करना आसान हो जाएगा। [1, 2]

स्थान और बनावट

स्थान: यह मंदिर रहली से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।

ऊंचाई और सीढ़ियां: यह पहाड़ी लगभग 300 से 500 फीट ऊंची है। मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 350 से 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य: यह पहाड़ी सागौन के हरे-भरे जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता से घिरी हुई है।

2.Gouridant

ABOUT…..

गौरीदंत (Gauridant / गौरीदांत) मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक पहाड़ी स्थल है। [1]

मुख्य बातें

स्थान: यह सागर जिले के रानगिर (Ranger) और नारायणपुर गांव के पास स्थित है

धार्मिक मान्यता: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस स्थान पर माँ गौरी (माता पार्वती) का दांत गिरा था, जिसके कारण इसका नाम ‘गौरीदंत’ पड़ा। यह स्थान महर्षि मार्कण्डेय का साधना स्थल भी माना जाता है।

बौद्ध कालीन अवशेष: यहाँ लगभग 800 साल पुराने बौद्ध स्तूप और बौद्ध अनुयायियों के विहार व मठों के अवशेष भी पाए गए हैं, जो इसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं। [1]

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जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर रहली रोड पर बरोदा के पास स्थित हैं दो ऊंचे पहाड़, जिनमें से एक है गौरीदंत या गौरीदांत। इस पहाड़ पर गौरी के मंदिर के साथ कई शिलालेख और स्तूपनुमा आकृतियां हैं। बताया जाता है कि इन्हें बरोदा निवासी इतिहासकार और वैद्य केशरीसिंह आर्य ने बनवाया था। लेकिन इनसे भी खास है यहां की गहरी गुफा, जिसमें साहसी लोग ही उतर पाते हैं। इस गुफा के अंदर करीब 30 फीट नीचे हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। उसके नीचे भी गुफा गई है, जिसकी गहराई 30-40 फीट बताई जाती है, लेकिन कम लोग ही वहां तक पहुंच पाते हैं।

बरोदा गांव से करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर गौरीदंत पहाड़ तक पहुंचा जाता है। इसके बाद शुरू होती है खड़ी चढ़ाई, जिसमें सांसें फूल जाती हैं। ऊपर पहुंचने पर मनोरम दृश्य दिखते हैं। यहां से रानगिर का जंगल और मंदिर भी दिखाई देते हैं। रानगिर की ओर इस चोटी पर करीब दो फीट चौड़ी खोह है, जिसमें लोहे की अस्थाई सीढ़ी लगा दी गई है। इससे करीब 15 फीट उतरने पर खड़े पहाड़ के किनारे पर पहुंच जाते हैं। करीब तीन-चार सौ फीट नीचे घना जंगल दिखता है। पैर फिसला तो सीधे इसी जंगल में पहुंचना तय है। यहीं बाजू में एक गुफा दिखती है, जो इतनी संकरी है कि बैठे-बैठे खिसककर ही 12-14 फीट तक जाना होता है। इसके बाद टॉर्च की रोशनी में करीब 15 फीट गहरी संकरी गुफा दिखती है। यहां भी लोहे की अस्थाई सीढ़ी लगा दी गई है। इस गुफा में दो कदम उतरते ही सैकड़ों चमगादड़ों से सामना होता है। गुफा में भयंकर सीलन है और कुछ पत्थरों से पानी भी रिस रहा है। नीचे उतरने पर गुफा बायीं ओर मुड़ जाती है, जहां करीब 8 फीट दूर एक कोने में हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है। यहां रखी दानपेटी और हनुमानजी को चढ़े फूल बताते हैं कि लोग यहां आते-जाते रहते हैं।

प्राकृतिक नजारे….

gouridant

3. Vandevi

ABOUT….

सागर जिले के केसली तहसील मुख्यालय से लगभग 6 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच माँ वनदेवी मंदिर स्थित है

स्थान: तुमरी / केसली रोड, जिला सागर, मध्य प्रदेश।

विशेषता: यह मंदिर चारों तरफ से हरे-भरे वनों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहाँ के रास्ते में बंदर व अन्य वन्यजीव भी देखने को मिलते हैं।

मान्यता: स्थानीय लोग यहाँ पूजा-अर्चना के साथ-साथ पिकनिक मनाने और दाल-बाटी आदि बनाने भी आते हैं। हर साल यहाँ, मुख्य मार्ग के पास मेले का आयोजन भी होता है।

क्या आप इस मंदिर तक पहुँचने के रास्ते (रूट) या वहाँ आयोजित होने वाले मेले के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं?

क्यों जाना चाहिए?

शांत वातावरण: ये मंदिर अमूमन घने जंगलों या प्राकृतिक परिवेश में होते हैं, जिससे यहाँ शहर की भागदौड़ से दूर मानसिक शांति मिलती है।

आस्था और मान्यता: भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहाँ पूरी होती हैं। कुछ स्थानों पर अनोखी परंपराएं भी हैं जैसे माता को पत्थर चढ़ाना।

यदि आप किसी विशेष स्थान या शहर के वनदेवी मंदिर के बारे में जानकारी चाहते हैं (जैसे रास्ता, समय या दूरी), तो कृपया उस जगह का नाम बताएं।

4. Rangir

मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील में स्थित रानगिर का हरसिद्धि माता मंदिर एक बेहद प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। [1, 2]

मुख्य विशेषताएं और मान्यताएं

दिन में तीन रूप: इस मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहाँ विराजमान माँ हरसिद्धि दिन भर में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं। सुबह के समय वे बाल अवस्था (कन्या रूप), दोपहर में युवा अवस्था (युवती रूप) और शाम को वृद्धावस्था (प्रौढ़ रूप) में नजर आती हैं।

शक्तिपीठ: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के समय यहाँ देवी सती की ‘रान’ (जांघ) गिरी थी, जिसके कारण इस जगह का नाम ‘रानगिर’ पड़ा। यह स्थान 52 शक्तिपीठों में गिना जाता है।

प्राकृतिक सौंदर्य: यह मंदिर देहार नदी के तट पर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जिसके चारों ओर घना जंगल और सुंदर प्राकृतिक दृश्य है। [1, 2]

कैसे पहुँचें

दूरी: यह मंदिर सागर जिला मुख्यालय से लगभग 35 से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मार्ग: सागर-रहली मार्ग तथा नेशनल हाईवे 44 से यहाँ आसानी से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।

यदि आप रानगिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो क्या आप यात्रा के साधन (निजी वाहन या बस) या नवरात्रि के दौरान दर्शन के समय के बारे में जानना चाहते हैं?

5. Lakha Banjara Lake

ABOUT….

लाखा बंजारा झील (जिसे सागर झील भी कहा जाता है) मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीचों-बीच स्थित एक ऐतिहासिक और विशाल झील है। sourabh.sbs

मुख्य विशेषताएं और इतिहास

स्थान: यह सागर शहर के केंद्र में स्थित है और लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है।

मान्यता है कि यह ऐतिहासिक झील कभी पूरी तरह नहीं सूखती है।

निर्माण और किंवदंती: इसका निर्माण लगभग 400 साल पहले हुआ था। लोक कथाओं और बुंदेलखंड के इतिहास के अनुसार, जब इस बड़ी झील में पानी नहीं आ रहा था, तब लाखा बंजारा नामक प्रसिद्ध व्यवसायी और शूरवीर ने पानी लाने के लिए अपने बेटे और बहू का बलिदान दिया था (उन्हें रत्नों से जड़े झूले में बैठाया था), जिसके बाद झील में पानी भर गया।

धुन-सौंदर्याकरण: हाल ही में इस झील का 97 करोड़ रुपये की लागत से कायाकल्प और सौंदर्याकरण किया गया है। यहां अब वोटिंग, क्रूज, फूड कोर्ट और लेजर लाइट शो जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

लाखा बंजारा झील की कहानी क्या है?

मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित लाखा बंजारा झील (सागर झील) लगभग 400 साल पुरानी और 400 एकड़ में फैली एक ऐतिहासिक झील है, जिसके पीछे एक प्रसिद्ध लोककथा और बलिदान की कहानी जुड़ी है।

बंजारा समुदाय मुख्य रूप से गोर वंश (या गौर राजपूत) से संबंधित है और खुद को क्षत्रिय मानता है। इतिहास में इन्हें बंजारा और ‘गोर बंजारा’ के नाम से जाना जाता है।

उत्पत्ति और मूल वंश

राजपूत वंश: बंजारा समाज की जड़ें राजस्थान के मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्र से जुड़ी हैं तथा इन्हें राजपूतों का वंशज माना जाता है।

प्रमुख कुल: यह समुदाय मुख्य रूप से चार प्रमुख कुलों (वंशों) में विभाजित है
:राठौड़ (भुक्य)
पम्हार (पवार)
चौहान (चवन)
वदित्य (जाधव)


आधुनिक रात के नजारे

6. Rahatgarh Fort

ABOUT…

राहतगढ़ किले का इतिहास….

राहतगढ़ किला मध्य प्रदेश के सागर जिले के राहतगढ़ नगर में बीना नदी के किनारे एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित ऐतिहासिक दुर्ग है। यह किला अपने विशाल परकोटे, बुर्जों, पुराने महलों और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।

प्राचीन इतिहास

राहतगढ़ क्षेत्र का इतिहास मध्यकाल से भी पुराना माना जाता है। यहां से परमार शासक जयवर्मन द्वितीय से संबंधित 13वीं शताब्दी का अभिलेख मिलने का उल्लेख मिलता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, इस अभिलेख से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र 13वीं शताब्दी में परमार शासकों के अधिकार में था।

बाद के समय में इस क्षेत्र पर चंदेल, गोंड, मुगल, बुंदेला और मराठा शक्तियों का प्रभाव रहा। इसलिए राहतगढ़ का इतिहास कई राजवंशों और राजनीतिक शक्तियों से जुड़ा हुआ है।

किले की विशेषताएँ

राहतगढ़ का किला लगभग 66 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके बाहरी परकोटे में 26 विशाल बुर्ज बताए जाते हैं। किले में महल, मंदिर, मस्जिद और अन्य ऐतिहासिक अवशेष मौजूद हैं।

किले में बादल महल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। पुराने विवरणों में जोगन-बुड़ी नामक स्थान का भी उल्लेख मिलता है। किले की ऊँची पहाड़ी और बीना नदी की प्राकृतिक स्थिति इसे सुरक्षा की दृष्टि से बेहद मजबूत बनाती थी।

1857 की क्रांति में भूमिका

राहतगढ़ किले के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय 1857 का स्वतंत्रता संग्राम है। विद्रोह के दौरान क्रांतिकारी सैनिकों ने किले पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद ब्रिटिश सेना ने किले को घेर लिया और उस पर हमला किया।

ब्रिटिश सेना की कार्रवाई के दौरान किले पर गोलाबारी हुई और विद्रोही सैनिकों ने कड़ी लड़ाई लड़ी। राहतगढ़ के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह की गतिविधियां तेज हुईं।

आज का राहतगढ़ किला

आज राहतगढ़ किला मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में आने वाले इस स्मारक की पहचान सागर क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में होती है। किले के पास स्थित राहतगढ़ जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

राहतगढ़ किला केवल एक पुराना दुर्ग नहीं है, बल्कि यह परमार काल से लेकर मध्यकालीन शासनों और फिर 1857 की क्रांति तक बुंदेलखंड-मध्य भारत के बदलते इतिहास का महत्वपूर्ण गवाह है।